12 फ़रवरी 2020 - 17:05
तुर्की की सरकार किसकी सेवा कर रही है, इस्लाम की या ज़ायोनिज़्म की?

सीरिया के इदलिब प्रांत में सीरियाई सेना को जो निरंतर विजय मिल रही है, उससे सबसे ज़्यादा तकलीफ़ तुर्की, अमरीका व ज़ायोनी शासन को है।

रिपोर्टों से पता चलता है कि सीरिया की सेना ने आठ के साल के बाद अंततः आतंकियों को खदेड़ कर दमिश्क़-हलब अंतर्राष्ट्रीय राजमार्ग का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। सीरिया में संघर्षरत पक्षों के लिए इस हाइवे का बड़ा स्ट्रेटेजिक महत्व है। सीरिया की सेना इस हाइवे पर नियंत्रण को अपने अहम लक्ष्यों में से एक मानती है और आतंकी इसी हाइवे को, सीरियाई सेना की प्रगति को रोकने के लिए इस्तेमाल करते थे। दमिश्क़-हलब राजमार्ग, उत्तरी सीरिया को दक्षिणी सीरिया से जोड़ता है और हलब, हमा, होम्स, दमिश्क़ और दरआ प्रांतों से गुज़रता है और जाॅर्डन से मिलने वाली इस देश की सीमा तक पहुंचता है। इसे सीरिया का सबसे लम्बा हाइवे माना जाता है। इस हाइवे पर सीरियाई सेना के नियंत्रणका मतलब है, सेना के ख़िलाफ़ कार्यवाहियों के लिए आतंकियों का एक मज़बूत क्षेत्र से वंचित हो जाना।

 

रिपोर्टों के अनुसार सीरिया की सेना ने हलब के निकट स्थित राशेदीन-4 मुहल्ले को भी आतंकियों से मुक्त करा लिया है। इसी तरह सीरिया के सैनिकों ने ख़ान असल और कफ़रनाहा इलाक़ों में भी आतंकियों पर हमले किए हैं। इस तरह सीरिया की सेना ने हलब-दमिश्क़ हाइवे की पूर्वी दिशा को पूरी तरह स्वतंत्र करा लिया है। इदलिब में आतंकियों को मिल रही निरंतर पराजय से तुर्की, अमरीका व ज़ायोनी शासन बुरी तरह छटपटा रहे हैं। तुर्की के रक्षा मंत्री ने कहा है कि नैटो, यूरोप और दुनिया को इदलिब पर सीरियाई सेना के हमलों को रुकवाने के लिए गंभीर क़दम उठाना चाहिए। तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान ने भी चेतावनी दी है कि अगर सीरिया में तुर्क सैनिकों पर हमले जारी रहे तो उनकी सेना कड़ा बदला लेगी। अर्दोग़ान ने इसी तरह दावा किया कि सीरिया की धरती में हमारा संघर्ष, तुर्की के अस्तित्व के लिए है। उन्होंने इस बात का उल्लेख करते हुए कि अगर सीरिया की स्थिति स्थिर न हुई तो तुर्की में हमारी स्थिति भी स्थिर नहीं होगी, कहा कि निश्चित रूप से सीरिया व तुर्की के लिए जो भी आवश्यक होगा, हम करेंगे।

 

अर्दोग़ान ने ऐसी स्थिति में ये दावे किए हैं कि जब तुर्क समाचारपत्र जुमहूरियत का कहना है कि इदलिब में तुर्की के आठ सैनिकों के मारे जाने से पूरा देश दुख में डूबा हुआ है। इन ख़बरों पर तुर्की के सरकारी हल्क़ों की प्रतिक्रिया लगभग एकसमान थी और उन्होंने ईंट का जवाब पत्थर से देने पर बल दिया। इसके बाद इस प्रकार की ख़बरें आईं कि तुर्क सेना ने अपने सैनिकों को मारने वाले सीरियाई सैनिकों के लक्ष्यों को पूरी तरह तबाह कर दिया। जुमहूरियत अख़बार का कहना है कि सीरिया के ये इलाक़े हमारे लिए दलदल की तरह हैं और जो कुछ पूर्वानुमान होता है, ज़मीनी वास्तविकता उससे अलग होती है। पत्र ने लिखा है कि तुर्की, इस समय सीरिया में संकट का समाधान नहीं बल्कि स्वयं संकट बन रहा है। इदलिब में तुर्की के विरोधी बहुत से आतंकी हैं जिन्हें अमरीका, आतंकवादी ही नहीं समझता। इस समय अमरीका की सबसे बड़ी इच्छा यह है कि तुर्की और रूस में मतभेद पैदा हो जाएं।

 

तुर्की के इस समाचारपत्र का कहना है कि सवाल यह है कि क्या अन्कारा भी कुछ अरब देशों की तरह अमरीका व ज़ायोनी शासन के हितों की सेवा करेगा और एक इस्लामी देश के हितों के ख़िलाफ़ एक भरपूर युद्ध शुरू कर देगा? अगर ऐसा होता है तो तुर्की की इस्लामवादी सरकार के पास इस देश और दुनिया भर के मुसलमानों को देने के लिए क्या जवाब होगा? (HN)